ध्वनि तरंग (Dhwani tarang)

325 276
Language Hindi
Binding Paperback
Pages 229
ISBN-10 9390889170
ISBN-13 978-9390889174
Publishing Year 2022
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Category:
Author: Ramanuj Anuj

जब आप जामो-साकी, हुस्नो-नजाकत, रुमानियत से ऊपर उठकर ग़ज़ल को मानवीय सम्बन्धों के यथार्थ धरातल पर दृष्टि हासिल कर लेंगे तब आपको बरबस ही स्वर्गीय दुष्यंत कुमार त्यागी और रामावतार त्यागी याद आएंगे। इनके बाद बहुत से नये चेहरे हैं जो हिंदी में ग़ज़ल लिख रहे हैं इन सबसे अलग रामानुज अनुज ने अपनी ठेठ और प्रभावशाली लेखनी से अपनी महत्वपूर्ण उपस्थिति दर्ज करायी है। ग़ज़ल को कलम की नोंक से नित नूतन प्रयोगों से चमत्कृत करने वाले रामानुज अनुज बड़ी सादगी के साथ बड़ी बात कह जाते हैं उनकी ग़ज़ल का प्रत्येक शेर उनके बेबाक तेवर की नुमाइंदगी करता है। प्रभावी संवेग, गहन संवेदना और सटीक प्रस्तुति को साथ लेकर अनुज ने ग़ज़ल का जो ताना-बाना बुना है वह समसामयिक घटनाओं, संवेगों और सम्वादों को व्याख्यायित करता है। ज़िंदगी के हर पहलुओं को अनुज ने अपनी शायरी में जिया है। प्रेम, तड़फ, रिश्ते और आशा-उम्मीद का समंदर ठाठें मारता है अनुज के अंदर, और वही ज्वार की सूरत में बिखर जाता है, कागज पर रोशनाई बनकर। काव्य की विधाओं में बात को कहने के लिए बिंबों व प्रतीकों का प्रयोग आम है। अनुज जी अपनी ग़ज़लों में इसे इतने सलीके से उपयोग करते हैं कि दृश्य और भाव उभरकर सामने आ जाते हैं। मुझे अनुज की लिखी दो हजार ग़ज़लों में से कुछ ग़ज़लों को छाँटकर संग्रह में सहेजने का बेहद मुश्किल कार्य करना पड़ा है। फिर भी एक बेबाक, निडर और ठेठ रंग की शायरी को पुस्तकीय शक्ल में लाकर अत्यंत प्रसन्नता का अनुभव कर रही हूँ। संग्रह की ग़ज़लें सात खण्डों में, यथा धरती, पानी, पवन, आकाश, आग, प्रकाश और ध्वनि में विभक्त है। प्रत्येक खण्ड की ग़ज़लों का मिजाज और लहजा अलग है। बिंब-वितान और आवाज में सूक्ष्म भिन्नता है।

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