Meri Bhaav Ganga (Kavya Sangrah) मेरी भाव गंगा (काव्य संग्रह)

200 170
Language Hindi
Binding Paperback
Pages 86
ISBN-10 9389984815
ISBN-13 978-9389984811
Book Dimensions 5.5" x 8.5"
Edition 1st
Publishing Year 2023
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Category:
Author: Sukhvinder Kaur

नारी, ईश्वर की श्रेष्ठ रचना है। इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं। वह ना केवल शारीरिक रूप से अपितु मानसिक व जैविक रूप से भी श्रेष्ठ है। और यह संरचनाएं उसके अस्तित्व व व्यक्तित्व को मोहक, आकर्षक, ममतामयी, कोमल, बलवान, संयमित और सहनशील बनाती हैं। अपने प्रत्येक रूप में वह कल्याणमयी है परंतु श्रेष्ठ होते हुए भी, उसकी सीमाओं को सीमित करने के लिये समाज द्वारा बनाए गए नियम–कानून और फिर उसका शोषण अत्यंत हृदय विदारक अध्याय हैं। समाज में हर समय कुछ न कुछ ऐसा घटित होता रहता है। मेरे इस संग्रह में उद्धृत अधिकतर रचनाएं ऐसी ही घटनाओं से निकली हुई वेदना है, ऐसी घटनाएं जो सामाजिक भी हो सकती हैं और व्यक्तिगत भी।

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